
ओपिनियन पोल, एग्ज़िट पोल और घर-घर सर्वे की प्रक्रिया, नियम और सीमाएँ
Chunav survey kaise hota hai, यह गाइड उम्मीदवारों की टीमों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों और विद्यार्थियों के लिए है। इसमें बताया गया है कि सैंपल कैसे चुना जाता है, सवाल कैसे लिखे जाते हैं, फील्ड टीम घर-घर या मतदान केंद्र के बाहर इंटरव्यू कैसे करती है, डेटा की जाँच और वेटिंग कैसे होती है, और चुनाव आयोग के कौन-से नियम मानने ज़रूरी हैं।
- सर्वे का तरीका, किसी दल का पक्ष नहीं
- ओपिनियन पोल और एग्ज़िट पोल का फ़र्क
- धारा 126 और 126A की पाबंदियाँ
- कोई भी सर्वे नतीजे की गारंटी नहीं देता

नमस्ते, मैं राम कुमार, यह सर्वे नमूना संस्था करा रही है। उद्देश्य: आपके मोहल्ले की सुविधाओं की जानकारी। यह स्वैच्छिक है, आप कभी भी मना कर सकते हैं।
चुनावी सर्वे किसी क्षेत्र के मतदाताओं के एक चुने हुए हिस्से से बात करके पूरे क्षेत्र की राय का अनुमान लगाता है। इसमें मुद्दे, नेताओं की पहचान, सरकार के कामकाज की राय और वोट देने का इरादा पूछा जाता है। यह अनुमान होता है, भविष्यवाणी नहीं, और हर अनुमान के साथ त्रुटि की एक सीमा जुड़ी रहती है।
सर्वे की ताक़त इस बात पर टिकी है कि जिनसे बात हुई, वे पूरे क्षेत्र की तस्वीर कितनी सही दिखाते हैं। अगर इंटरव्यू सिर्फ़ शहर के चौराहों या एक ही समुदाय के मोहल्लों में हुए, तो बड़ा सैंपल भी ग़लत नतीजा देगा। इसलिए अच्छा सर्वे गाँव और शहर, महिला और पुरुष, उम्र के अलग-अलग समूह और पूरे क्षेत्र के भूगोल को ध्यान में रखकर बनता है।
राय बदलती भी है। नामांकन, गठबंधन, स्थानीय घटनाएँ और आख़िरी हफ़्ते का प्रचार वोट के इरादे को बदल सकते हैं। इसलिए किसी एक सर्वे को उस तारीख़ की तस्वीर मानें, चुनाव का फ़ैसला नहीं।
सर्वे शुरू करने से पहले तय करें
- सर्वे का मक़सद और सवाल
- कौन-सा क्षेत्र: बूथ, विधानसभा या लोकसभा
- सैंपल का आकार
- इंटरव्यू की भाषा
- फील्ड की तारीख़ें
- रिपोर्ट में क्या चाहिए
ये चरण विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय निकाय, तीनों तरह के सर्वे पर लागू होते हैं। हर चरण का लिखित रिकॉर्ड रखें, ताकि बाद में तरीका जाँचा जा सके।
- 01
1. मक़सद लिखें
तय करें कि सर्वे मुद्दे समझने के लिए है, नेता की पहचान जानने के लिए, या वोट के इरादे का अनुमान लगाने के लिए। सवाल इसी से निकलेंगे।रिसर्च टीम3,000लक्ष्य घर2,184विज़िट1,962पूर्ण सर्वे1,871स्वीकृतदैनिक स्वीकृत सर्वेपिछले 12 दिन - 02
2. सैंपल डिज़ाइन बनाएँ
क्षेत्र को मतदान केंद्रों या गाँव-वार्डों में बाँटकर उनमें से रैंडम तरीके से चुनें, फिर हर जगह तय नियम से घर या मतदाता चुनें।सांख्यिकी टीम123456789101112131415161718192021222324252627282930A मज़बूतB ठीकC कमज़ोरD बहुत कमज़ोरआज रिपोर्ट नहीं - 03
3. प्रश्नावली लिखें
सवाल छोटे, निष्पक्ष और स्थानीय बोली में हों। वोट का सवाल आख़िर के पास रखें, ताकि पहले के सवाल जवाब पर असर न डालें।रिसर्च टीमसर्वे 3/6 · सुविधाएँऑफलाइनआपके मोहल्ले में पीने के पानी की स्थिति?- नियमित आती है
- कभी-कभी आती है
- बहुत कम / नहीं
- पता नहीं
✓ सेक्शन फोन में सुरक्षित · autosaveपीछेआगे - 04
4. पायलट करें
सैंपल से बाहर कुछ मतदाताओं से इंटरव्यू करके देखें कि सवाल समझ आते हैं या नहीं और इंटरव्यू कितना लंबा चलता है।फील्ड टीमघर #17 · परिचय-सहमतिनमस्ते, मैं राम कुमार, यह सर्वे नमूना संस्था करा रही है। उद्देश्य: आपके मोहल्ले की सुविधाओं की जानकारी। यह स्वैच्छिक है, आप कभी भी मना कर सकते हैं।
सहमति v2 · 09:44सहमत — सर्वे शुरूमना किया - 05
5. सर्वेयर को प्रशिक्षण दें
सहमति लेना, बिना झुकाव के सवाल पढ़ना, जवाब न सुझाना और ऐप चलाना सिखाएँ। मॉक इंटरव्यू से जाँचें।फील्ड सुपरवाइज़र
- 06
6. फील्डवर्क और सत्यापन
हर इंटरव्यू GPS और समय के साथ दर्ज हो। सुपरवाइज़र कुछ घरों में दोबारा जाकर जाँच करें और संदिग्ध रिकॉर्ड अलग रखें।फील्ड टीमलोकेशन सबूतसर्वे #BS-0412- क्षेत्र मेंअनुमानित सीमा के भीतर
- Accuracy±12 m
- समय09:42 · ताज़ा fix
- Mock GPSनहीं मिला
- इंटरव्यू अवधि11 मिनट
स्वीकृत गिनती में जुड़ा - 07
7. वेटिंग और विश्लेषण
उम्र, लिंग और गाँव-शहर के अनुपात को जनगणना या मतदाता आँकड़ों के कुल योग से मिलाने के लिए वेटिंग करें।विश्लेषक3,000लक्ष्य घर2,184विज़िट1,962पूर्ण सर्वे1,871स्वीकृतदैनिक स्वीकृत सर्वेपिछले 12 दिन - 08
8. रिपोर्ट में तरीका बताएँ
सैंपल का आकार, तारीख़ें, तरीका और त्रुटि की सीमा हर नतीजे के साथ लिखें। सीमाएँ छिपाएँ नहीं।रिसर्च टीमऑफलाइननेटवर्क नहीं6फोन में सुरक्षित8सर्वर पर पहुँचेनेटवर्क आते ही अपने-आप सिंक
- नियमित आती है
- कभी-कभी आती है
- बहुत कम / नहीं
- पता नहीं
नमस्ते, मैं राम कुमार, यह सर्वे नमूना संस्था करा रही है। उद्देश्य: आपके मोहल्ले की सुविधाओं की जानकारी। यह स्वैच्छिक है, आप कभी भी मना कर सकते हैं।

- क्षेत्र मेंअनुमानित सीमा के भीतर
- Accuracy±12 m
- समय09:42 · ताज़ा fix
- Mock GPSनहीं मिला
- इंटरव्यू अवधि11 मिनट
ओपिनियन पोल मतदान से पहले मतदाताओं के घर, फ़ोन या ऑनलाइन पूछता है कि वे किसे वोट देने का इरादा रखते हैं और क्यों। एग्ज़िट पोल मतदान के दिन वोट डालकर निकले मतदाताओं से पूछता है। दोनों के सैंपल, समय और क़ानूनी पाबंदियाँ अलग हैं, इसलिए नतीजे भी अलग तरह से पढ़े जाते हैं।
| पहलू | ओपिनियन पोल | एग्ज़िट पोल |
|---|---|---|
| कब होता है | मतदान से पहले, हफ़्तों या दिनों पहले | मतदान के दिन, वोट डालने के बाद |
| किससे पूछा जाता है | संभावित मतदाता, जो शायद वोट न भी दें | जिन्होंने वोट डाला है |
| कहाँ | घर-घर, फ़ोन या ऑनलाइन | चुने हुए मतदान केंद्रों के बाहर, तय दूरी पर |
| मुख्य जोखिम | राय बदलना और मतदान न करने वाले लोग | जवाब देने से मना करना और केंद्रों का चुनाव |
| प्रकाशन पर रोक | धारा 126: मतदान ख़त्म होने से पहले के 48 घंटे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर | धारा 126A: ECI की अधिसूचित अवधि में करना और प्रकाशित करना मना |
हर चुनाव की सही तारीख़ें और अवधि उस चुनाव के लिए जारी ECI अधिसूचना से ही देखें।
एग्ज़िट पोल में पहले क्षेत्र के मतदान केंद्रों में से रैंडम तरीके से कुछ केंद्र चुने जाते हैं। मतदान के दिन सर्वेयर केंद्र से तय दूरी पर खड़े होकर तय अंतराल पर, जैसे हर दसवें निकलने वाले मतदाता से, गोपनीय तरीके से पूछते हैं। फिर जवाबों को पिछले मतदान के आँकड़ों से वेट किया जाता है।
एग्ज़िट पोल के मुख्य चरण
मतदाता की गोपनीयता और आचार संहिता का पालन हर चरण में ज़रूरी है।
- मतदान केंद्रों का रैंडम चुनाव, पूरे क्षेत्र में फैला हुआ।
- हर केंद्र पर मतदाता चुनने का तय नियम, सर्वेयर की मर्ज़ी नहीं।
- गोपनीय पर्ची या ऐप पर जवाब, ताकि पास खड़े लोग न देखें।
- मना करने वालों की गिनती भी दर्ज करना।
- समय-समय पर डेटा भेजना और केंद्रवार जाँच।
धारा 126A क्या कहती है
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126A के तहत चुनाव आयोग जिस अवधि को अधिसूचित करता है, उसमें एग्ज़िट पोल करना और उसके नतीजे किसी भी माध्यम से प्रकाशित या प्रसारित करना मना है। उल्लंघन पर दो साल तक की क़ैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। आम चुनाव में यह अवधि आमतौर पर पहले चरण के मतदान शुरू होने से आख़िरी चरण के मतदान ख़त्म होने के आधे घंटे बाद तक रहती है।
एग्ज़िट पोल में न करें
- केंद्र के पास भीड़ लगाना
- मतदाता का नाम या पहचान लिखना
- अधिसूचित अवधि में नतीजे साझा करना
- किसी दल के बैज या प्रचार सामग्री के साथ जाना
सर्वे पर हमारी राय
घर-घर सर्वे में सर्वेयर पहले से चुने गए गाँव या वार्ड में जाते हैं, तय नियम से घर चुनते हैं, घर में योग्य मतदाता चुनते हैं, सहमति लेते हैं और मोबाइल ऐप पर इंटरव्यू दर्ज करते हैं। GPS, समय और सुपरवाइज़र की दोबारा जाँच से पक्का होता है कि इंटरव्यू सच में हुआ।
घर और व्यक्ति कैसे चुने जाते हैं
गली के एक छोर से शुरू करके हर तय संख्या वाले घर को चुना जाता है, जैसे हर पाँचवाँ घर। घर में 18 साल से ऊपर के सदस्यों में से एक को तय नियम से चुना जाता है, ताकि सिर्फ़ वही व्यक्ति न गिना जाए जो दरवाज़ा खोलता है। महिलाओं और युवाओं की सही गिनती के लिए अक्सर शाम या छुट्टी के दिन दोबारा जाना पड़ता है।
सहमति और गोपनीयता
इंटरव्यू से पहले बताया जाता है कि सर्वे कौन कर रहा है, जवाब गोपनीय रहेंगे और मतदाता किसी भी सवाल का जवाब न देने के लिए स्वतंत्र है। मतदाता सूची का निजी डेटा या किसी व्यक्ति की वोट पसंद उसके नाम के साथ जोड़कर नहीं रखी जानी चाहिए।
फील्ड में आम दिक्कतें
घर पर कोई न मिलना, परिवार के बड़ों का जवाब देने में दख़ल, राजनीतिक सवालों पर झिझक, नेटवर्क न होना और बारिश या त्योहार में काम रुकना आम है। ऑफलाइन ऐप और रोज़ाना की समीक्षा इन्हें संभालने में मदद करती है।
ज़्यादातर ग़लत अनुमान इन्हीं ग़लतियों से आते हैं।
सैंपल
- सिर्फ़ शहर या सड़क किनारे के गाँव
- महिलाओं की कम गिनती
- सर्वेयर की मर्ज़ी से घर चुनना
- पिछली बार के बूथ ही दोहराना
सवाल
- झुकाव वाले शब्द
- वोट का सवाल शुरू में
- किसी नेता का नाम पहले लेना
- बहुत लंबा इंटरव्यू
रिपोर्ट
- त्रुटि की सीमा न बताना
- वोट प्रतिशत से सीधे सीटें गिनना
- तारीख़ और सैंपल छिपाना
- कम अंतर को पक्की जीत बताना
यह सही नहीं है अगर
- चुनाव नतीजे की गारंटी देना
- मतदाताओं की निजी पहचान या पसंद ट्रैक करना
- धारा 126 या 126A की अवधि में नतीजे प्रकाशित करना
- किसी दल के पक्ष में राय बनाना
यह सही है अगर
- क्षेत्र के मुद्दे और प्राथमिकताएँ समझना
- नेता की पहचान और छवि जानना
- समय के साथ राय में बदलाव देखना
- प्रचार की योजना के लिए निष्पक्ष आँकड़े
राजनीतिक सर्वे सेवाएँ
विधानसभा और लोकसभा सर्वे, बूथ प्रबंधन और लाइव डैशबोर्ड।
और जानेंExit poll methodology (English)
एग्ज़िट पोल के सैंपल और नियमों पर विस्तार से।
और जानेंHow to conduct an election survey (English)
चुनावी सर्वे की अंग्रेज़ी गाइड।
और जानेंसर्वे एजेंसी कैसे चुनें (English)
एजेंसी से पूछने लायक सवाल।
और जानेंसवाल कैसे बनाएँ (English)
प्रश्नावली लिखने और पायलट करने के नियम।
और जानेंइस विषय पर सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवालों के सीधे जवाब।
Political survey kaise karaye?
पहले मक़सद, क्षेत्र, सैंपल का आकार और समय-सीमा लिखें। फिर एजेंसी से सैंपल डिज़ाइन, प्रश्नावली, सर्वेयर प्रशिक्षण, GPS सत्यापन और बैक-चेक का तरीका लिखित में माँगें। जो एजेंसी पक्की जीत या तय सीटों का वादा करे, उससे बचें। रिपोर्ट में तरीका और त्रुटि की सीमा ज़रूर माँगें।
Voter survey kaise kare?
क्षेत्र के मतदान केंद्रों या गाँव-वार्डों में से रैंडम चुनाव करें, हर जगह तय नियम से घर और मतदाता चुनें, सहमति लेकर निष्पक्ष सवाल पूछें और हर इंटरव्यू को ऐप पर GPS के साथ दर्ज करें। कुछ घरों में दोबारा जाकर जाँच करें और नतीजों को जनसंख्या अनुपात से वेट करें।
चुनावी सर्वे में कितने लोगों से बात करनी चाहिए?
यह इस पर निर्भर है कि कितनी सटीकता चाहिए और कितने उप-समूहों के अलग नतीजे चाहिए। पूरे क्षेत्र का अनुमान छोटे सैंपल से मिल सकता है, पर हर ब्लॉक या समुदाय के अलग नतीजों के लिए बड़ा सैंपल चाहिए। संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है कि सैंपल पूरे क्षेत्र में सही तरीके से फैला हो।
क्या ओपिनियन पोल कभी भी प्रकाशित किया जा सकता है?
नहीं। धारा 126 के तहत मतदान ख़त्म होने से पहले के 48 घंटों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर ओपिनियन पोल समेत चुनावी सामग्री दिखाना मना है। एग्ज़िट पोल पर धारा 126A के तहत ECI की अधिसूचित पूरी अवधि में रोक रहती है। हर चुनाव की अधिसूचना अलग से देखें।
सर्वे और असली नतीजे अलग क्यों आते हैं?
सैंपल में कुछ समूह छूट जाना, लोगों का सच न बताना, आख़िरी दिनों में राय बदलना, कम मतदान और वोट प्रतिशत को सीटों में बदलने का जोखिम, ये सब अंतर की वजह बनते हैं। इसीलिए हर सर्वे एक अनुमान है और उसे त्रुटि की सीमा के साथ पढ़ना चाहिए।

क्षेत्र, समय-सीमा और जानने लायक सवाल बताइए। हम सैंपल, प्रश्नावली और फील्ड योजना का प्रस्ताव भेजेंगे, कीमत कोटेशन पर।