
सबसे ऊपर का स्तर। यहाँ से तीन ढाँचे साथ उतरते हैं — प्रशासनिक (ग्रामीण), निकाय (शहरी) और निर्वाचन। प्रोजेक्ट बनाते समय आप बस राज्य चुनते हैं; नीचे की सूची पहले से मौजूद है।

Every state, every vidhan sabha, every gram panchayat and ward — LGD-coded and ready before day one.
नेता, प्रोग्राम मैनेजर या अधिकारी को कोई क्षेत्र हाथ से नहीं जोड़ना पड़ता। राज्य, ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत, गाँव, नगर निकाय, वार्ड, लोकसभा, विधानसभा और मतदान केंद्र — सरकारी LGD कोड और हिंदी+अंग्रेज़ी नामों के साथ सिस्टम में मौजूद। लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय या पंचायत — किसी भी चुनाव के लिए, किसी भी राज्य में। नक्शे पर राज्य पर hover करें।
Administrative (rural), local-body (urban) and electoral hierarchies, mapped to each other
भारत का भूगोल एक पेड़ नहीं है। एक गाँव एक ग्राम पंचायत में, एक ब्लॉक में, एक विधानसभा में और एक लोकसभा में — पर ये सीमाएँ एक-दूसरे को काटती हैं। इसलिए हर क्षेत्र-रिकॉर्ड में तीनों संदर्भ रहते हैं।
नीचे स्क्रॉल करते रहें — हर कार्ड एक स्तर नीचे उतरता है। कोड नमूना हैं और सिर्फ़ यह दिखाते हैं कि हर स्तर का अपना स्थायी कोड होता है; ‘X’ की जगह असली अंक LGD से आते हैं।
All 28 states and 8 union territories — districts, assembly seats, load status
ज़िलों की संख्या सार्वजनिक LGD/जनगणना डेटा से अनुमानित है और राज्यों के पुनर्गठन से बदलती रहती है; जहाँ हमें पक्का पता नहीं, वहाँ ‘—’ लिखा है। विधानसभा सीटें निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आँकड़े हैं। ‘LGD ढाँचा लोड’ = राज्य से गाँव/वार्ड तक कोडेड सूची सिस्टम में; ‘विस्तृत डेटा-लोड’ = polygons, centroid, GP–गाँव mapping सत्यापित।
| राज्य / UT | ज़िले (लगभग) | विधानसभा सीटें | स्थिति |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 75 | 403 | विस्तृत डेटा-लोड |
| महाराष्ट्र | 36 | 288 | LGD ढाँचा लोड |
| पश्चिम बंगाल | 23 | 294 | LGD ढाँचा लोड |
| बिहार | 38 | 243 | LGD ढाँचा लोड |
| तमिलनाडु | 38 | 234 | LGD ढाँचा लोड |
| मध्य प्रदेश | 55 | 230 | LGD ढाँचा लोड |
| कर्नाटक | 31 | 224 | LGD ढाँचा लोड |
| राजस्थान | 41 | 200 | LGD ढाँचा लोड |
| गुजरात | 33 | 182 | LGD ढाँचा लोड |
| आंध्र प्रदेश | 26 | 175 | LGD ढाँचा लोड |
| ओडिशा | 30 | 147 | LGD ढाँचा लोड |
| केरल | 14 | 140 | LGD ढाँचा लोड |
| तेलंगाना | 33 | 119 | LGD ढाँचा लोड |
| असम | 35 | 126 | LGD ढाँचा लोड |
| पंजाब | 23 | 117 | LGD ढाँचा लोड |
| छत्तीसगढ़ | 33 | 90 | LGD ढाँचा लोड |
| हरियाणा | 22 | 90 | LGD ढाँचा लोड |
| झारखंड | 24 | 81 | LGD ढाँचा लोड |
| उत्तराखंड | 13 | 70 | LGD ढाँचा लोड |
| हिमाचल प्रदेश | 12 | 68 | LGD ढाँचा लोड |
| दिल्ली | 11 | 70 | LGD ढाँचा लोड |
| जम्मू-कश्मीर | 20 | 90 | LGD ढाँचा लोड |
| मणिपुर | 16 | 60 | LGD ढाँचा लोड |
| मिज़ोरम | 11 | 40 | LGD ढाँचा लोड |
| नागालैंड | — | 60 | LGD ढाँचा लोड |
| त्रिपुरा | 8 | 60 | LGD ढाँचा लोड |
| मेघालय | 12 | 60 | LGD ढाँचा लोड |
| अरुणाचल प्रदेश | — | 60 | LGD ढाँचा लोड |
| गोवा | 2 | 40 | LGD ढाँचा लोड |
| सिक्किम | 6 | 32 | LGD ढाँचा लोड |
| पुदुचेरी | 4 | 30 | LGD ढाँचा लोड |
| लद्दाख | — | — | LGD ढाँचा लोड |
| चंडीगढ़ | 1 | — | LGD ढाँचा लोड |
| अंडमान-निकोबार | 3 | — | LGD ढाँचा लोड |
| दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव | 3 | — | LGD ढाँचा लोड |
| लक्षद्वीप | 1 | — | LGD ढाँचा लोड |
स्रोत: LGD (lgdirectory.gov.in), भारत निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग। ज़िलों की संख्या समय के साथ बदलती है (नए ज़िलों की अधिसूचना); प्रोजेक्ट शुरू होने पर उस राज्य का ताज़ा LGD संस्करण लोड और सत्यापित होता है। UT जहाँ विधानसभा नहीं है, वहाँ ‘—’। पट्टी सिर्फ़ सीटों की तुलना दिखाती है (403 = पूरी पट्टी)।
Village-level coverage: LGD code, census centroid, approximate radius
ग्रामीण सर्वे की इकाई गाँव है, और गाँव का नाम अकेला काफ़ी नहीं — एक ज़िले में ‘रामपुर’ दस हो सकते हैं। इसलिए हर गाँव अपने LGD कोड, ग्राम पंचायत, ब्लॉक और ज़िले के साथ सिस्टम में है, और उसका जनगणना-आधारित centroid + अनुमानित radius लोकेशन-सत्यापन का आधार है।

Urban local bodies: municipal corporation, council, nagar panchayat → ward → mohalla
शहरी भूगोल तेज़ी से बदलता है — परिसीमन, नए वार्ड, नगर पंचायत से नगर पालिका। LGD से ULB और वार्ड के कोड; वार्ड-सीमा राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना से, प्रोजेक्ट-वार सत्यापित। घनी आबादी में GPS accuracy 50–200 m तक जाती है, इसलिए वार्ड-सर्वे में ‘सीमा के पास’ वर्ग बड़ा होता है और समीक्षा-नीति पहले तय होती है।

Assembly constituency polygons from open datasets; booth master from CEO lists
विधानसभा और लोकसभा के polygons खुले लाइसेंस वाले डेटासेट से हैं — सीमा-स्थिति रिपोर्ट में लिखी होती है। बूथ सूची (भाग संख्या, बूथ नाम, भवन, क्षेत्र, मतदाता संख्या) विधानसभा-वार CEO की PDF या CSV से इम्पोर्ट; बूथ की लोकेशन मैनुअल पिन या upload से, क्योंकि आधिकारिक कोऑर्डिनेट सार्वजनिक रूप से एकसमान नहीं मिलते।

Offline map tiles, GPS without network, sync whenever signal returns
कवरेज का मतलब सिर्फ़ सूची में नाम होना नहीं — वहाँ काम हो पाना है। ऐप ऑफलाइन-फर्स्ट है: नक्शे की टाइल्स और फ़ॉर्म सुबह डाउनलोड, GPS fix बिना नेटवर्क के भी (A-GPS वैकल्पिक), सिंक जब भी सिग्नल मिले — रात को घर पर भी। डैशबोर्ड ‘अंतिम अपडेट X मिनट पहले’ ईमानदारी से दिखाता है।

Lok Sabha, Vidhan Sabha, urban local body, panchayat — pick the unit before you pick the team
पैनल पर कर्सर ले जाएँ (मोबाइल पर टैप करें)। चुनाव का प्रकार तय करता है कि असाइनमेंट किस इकाई पर होगा, सीमा कहाँ से आएगी और रिपोर्ट कहाँ रोल-अप होगी। विस्तृत नियम नीचे टैब में हैं।




Approximate boundaries, open data, no Survey of India purchase — and the five location states that follow
किसी भी सर्वे-ऐप के पास भारत के हर गाँव की सत्यापित सीमा नहीं है। फ़र्क़ यह है कि हम इसे प्रोडक्ट में लिखते हैं, छिपाते नहीं।

हर क्षेत्र-रिकॉर्ड इन्हीं सार्वजनिक स्रोतों से बनता है — और हर रिकॉर्ड पर लिखा रहता है कि कौन-सा हिस्सा कहाँ से, किस तारीख का आया।
चुनाव का प्रकार तय करता है कि इकाई क्या है, सीमा कहाँ से आती है और रिपोर्ट किस स्तर पर रोल-अप होती है। टैब बदलकर देखें।
लोकसभा सर्वे में भूगोल तीन स्तर का चाहिए: PC → AC → मतदान केंद्र। Bharat Survey में PC और AC की सूची और open polygons पहले से हैं; बूथ सूची विधानसभा-वार CEO की PDF/CSV से इम्पोर्ट होती है। असाइनमेंट AC या बूथ-समूह (मंडल/शक्ति केंद्र) पर, रिपोर्ट AC-वार तुलना के साथ।
विधानसभा चुनाव सर्वे का सबसे आम प्रोजेक्ट: एक AC, 10–30 सीटें, पंचायत/वार्ड-वार असाइनमेंट। AC polygon open dataset से, गाँव/वार्ड LGD से (centroid + radius), बूथ CEO सूची से। बूथ मैनेजमेंट, रेटिंग A/B/C/D और वॉर रूम यहीं सबसे ज़्यादा काम आते हैं। पहला विस्तृत डेटा-लोड उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभाओं का है।
शहरी सर्वे में वार्ड ही इकाई है। LGD में हर ULB और वार्ड का कोड है; वार्ड-सीमाएँ राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना से आती हैं और परिसीमन के बाद बदलती हैं — इसलिए प्रोजेक्ट-वार सत्यापन। मोहल्ला/कॉलोनी को स्थानीय ID मिलती है। Ward wise survey के लिए असाइनमेंट वार्ड पर, रिपोर्ट वार्ड-वार और ज़ोन-वार।
पंचायत चुनाव और ग्रामीण विकास सर्वे की इकाई ग्राम पंचायत है। LGD से ब्लॉक, GP और गाँव की सूची और GP–गाँव mapping; गाँव का centroid जनगणना-आधारित। जिला/क्षेत्र पंचायत के वार्ड राज्य निर्वाचन आयोग की सूची से। असाइनमेंट GP पर, लक्ष्य गाँव-वार, रिपोर्ट GP-वार।
Worked examples: a rural address, an urban address, and the electoral view of both
नाम असली जगहों के नमूने हैं और कोड की जगह ‘X’ है — मक़सद ढाँचा दिखाना है, आँकड़ा नहीं। कार्ड एक-दूसरे पर चढ़ते जाएँगे।
ग्रामीण सर्वे में हर रिकॉर्ड इस पूरी कड़ी के साथ सेव होता है। ‘बरौली’ नाम के कई गाँव हो सकते हैं — कोड से वे अलग रहते हैं। टोला आधिकारिक सूची में नहीं है, इसलिए उसे स्थानीय ID मिलती है और रिपोर्ट में वह ‘बरौली खास’ में रोल-अप होता है।
शहर में ब्लॉक और ग्राम पंचायत नहीं होते; उनकी जगह नगर निकाय और वार्ड आते हैं। वार्ड-सीमा राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना से आती है और परिसीमन के बाद बदलती है, इसलिए हर प्रोजेक्ट में ताज़ा अधिसूचना से सत्यापन होता है।
ऊपर के दोनों पते इसी ढाँचे से भी जुड़ते हैं: बरौली खास और वार्ड 14 दोनों किसी विधानसभा और किसी बूथ के क्षेत्र में आते हैं। ये सीमाएँ प्रशासनिक सीमाओं को काटती हैं, इसलिए AC ↔ पंचायत/वार्ड mapping सेटअप के दिन सत्यापित होती है।
Local Government Directory (LGD) भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की आधिकारिक निर्देशिका है। इसमें हर राज्य, ज़िला, उप-ज़िला/तहसील, ब्लॉक, ग्राम पंचायत, गाँव, नगर निकाय और वार्ड का एक स्थायी संख्यात्मक कोड है, साथ में उनके आपसी संबंध (कौन-सा गाँव किस GP में, कौन-सी GP किस ब्लॉक में)। सर्वे में इसकी ज़रूरत तीन वजहों से है: (1) एक-नाम वाले क्षेत्र — एक ज़िले में कई ‘रामपुर’ और ‘नगला’ होते हैं; कोड से वे अलग रहते हैं। (2) दूसरे डेटा से मिलान — सरकारी योजनाओं, जनगणना और विभागीय पोर्टल पर वही कोड चलते हैं, इसलिए आपकी सर्वे-रिपोर्ट उनसे जुड़ सकती है। (3) समय के साथ स्थिरता — नाम की वर्तनी बदलती है, कोड नहीं। Bharat Survey का पूरा भूगोल इन्हीं कोड पर है; हर क्षेत्र-रिकॉर्ड में LGD कोड, स्रोत और लोड की तारीख लिखी होती है।
विधानसभा चुनाव सर्वे की योजना चार सवालों से बनती है। इकाई क्या है? — ग्रामीण AC में ग्राम पंचायत, शहरी में वार्ड, और दोनों में बूथ (भाग संख्या) रोल-अप के लिए। कितनी सीटें? — एक AC में 200–400 बूथ और 1.5–3 लाख मतदाता; 10–30 सीटों का प्लान सामान्य है, जिसमें एक वॉलंटियर 8–12 दिन में 300 घर करता है। सुपरवाइज़र का दायरा? — ब्लॉक या ज़ोन; 1 सुपरवाइज़र पर 8–10 वॉलंटियर। रिपोर्ट किस स्तर पर? — पंचायत/वार्ड-वार मुद्दे, बूथ-वार रेटिंग, AC-स्तर सारांश। बूथ मास्टर CEO की सूची से इम्पोर्ट कीजिए, बूथ की लोकेशन पिन कीजिए, और ‘सीमा के पास’ की समीक्षा-नीति पहले दिन तय कीजिए। मतदाता सूची का व्यक्तिगत डेटा v1 में इम्पोर्ट नहीं होता — बूथ-स्तर के मास्टर पर काम होता है।
नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत में इकाई वार्ड है। वार्ड-सीमाएँ राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना से आती हैं और परिसीमन के बाद बदलती हैं — इसलिए हर प्रोजेक्ट में ताज़ा अधिसूचना से सत्यापन। मोहल्ला/कॉलोनी को स्थानीय ID मिलती है ताकि वॉलंटियर को ‘वार्ड 14, गली नंबर 6’ स्तर का असाइनमेंट मिल सके। शहरी सर्वे की दो ख़ास चुनौतियाँ: घनी बस्ती में GPS accuracy 50–200 m, जिससे ‘सीमा के पास’ और ‘कमज़ोर सिग्नल’ वर्ग बड़े होते हैं; और बहुमंज़िला इमारतें, जहाँ household roster (एक बिल्डिंग, कई घर) काम आता है। रिटेल ऑडिट और फैसिलिटी सर्वे में दुकान/सुविधा की सूची वार्ड पर मैप होती है और फोटो-सबूत के साथ रिपोर्ट बनती है।
पंचायत चुनाव, ग्रामीण विकास कार्यक्रम और NGO/सरकारी household सर्वे की इकाई ग्राम पंचायत है। LGD से ब्लॉक, GP और गाँव की सूची और GP–गाँव mapping; गाँव का centroid जनगणना-आधारित। जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के वार्ड राज्य निर्वाचन आयोग की सूची से। असाइनमेंट GP पर, लक्ष्य गाँव-वार, रिपोर्ट GP → ब्लॉक → ज़िला। गाँव की सीमा अनुमानित है, इसलिए बैज ‘अनुमानित रूप से क्षेत्र में’ कहता है और साफ़ बाहर (किलोमीटरों दूर) वाले रिकॉर्ड ही ‘क्षेत्र से बाहर’ फ़्लैग होते हैं। टोला/मजरा/पुरवा — जो आधिकारिक सूची में गाँव नहीं हैं — को गाँव के भीतर स्थानीय उप-क्षेत्र ID मिलती है और रिपोर्ट में स्रोत ‘स्थानीय’ लिखा होता है, ताकि LGD से मिलान बना रहे।
LGD की सूची पहली बार खोलने पर कॉलम बहुत लगते हैं, पर सर्वे के काम की बातें पाँच ही हैं। (1) कोड एक पहचान है, पता नहीं। गाँव के कोड के अंकों में ज़िला या ब्लॉक छिपा नहीं होता; कौन-सा गाँव किस ग्राम पंचायत में है, यह अलग mapping तालिका बताती है। इसलिए कोड के शुरुआती अंकों से ज़िला निकालने की कोशिश मत कीजिए। (2) हर स्तर की अपनी कोड-सूची है। राज्य, ज़िला, उप-ज़िला/तहसील, ब्लॉक, ग्राम पंचायत (स्थानीय निकाय), गाँव, नगर निकाय और वार्ड — सबके कोड अलग शृंखला में चलते हैं, इसलिए ‘1234’ ब्लॉक भी हो सकता है और किसी और सूची में कुछ और; कोड हमेशा स्तर के साथ पढ़िए। (3) नाम बदलते हैं, कोड नहीं। ‘रामपुर’, ‘Rampur’, ‘राम पुर’ — वर्तनी तीन, कोड एक। अपनी household सूची या पुरानी रिपोर्ट को कोड से जोड़िए, नाम से नहीं। (4) राजस्व ग्राम और ग्राम पंचायत अलग चीज़ें हैं। एक GP में कई गाँव हो सकते हैं और दोनों का नाम एक जैसा भी हो सकता है (GP बरौली, गाँव बरौली खास)। (5) सूची जीवित है। नए ज़िले, नए नगर निकाय, पंचायतों का पुनर्गठन — LGD अपडेट होती रहती है, इसलिए हम हर लोड की तारीख लिखते हैं और प्रोजेक्ट की शुरुआत में ताज़ा संस्करण लेते हैं।
CSV/Excel निर्यात में हर रिकॉर्ड के साथ क्षेत्र का नाम और कोड दोनों कॉलम आते हैं, साथ में सीमा-स्थिति (सत्यापित / अनुमानित / उपलब्ध नहीं) और लोकेशन-स्थिति। इससे आपकी रिपोर्ट सरकारी योजनाओं के डेटा या अपनी पुरानी सर्वे-फ़ाइल से कोड के आधार पर जोड़ी जा सकती है। टोला/मजरा जैसी स्थानीय इकाइयों का स्रोत ‘स्थानीय’ लिखा होता है और वे अपने LGD गाँव के कोड के साथ आती हैं।
मान लीजिए आपका प्रोजेक्ट लखनऊ ज़िले की एक विधानसभा है (नाम नमूना हैं)। उसके ग्रामीण हिस्से में रास्ता ऐसा है: ज़िला → ब्लॉक मलिहाबाद → ग्राम पंचायत बरौली → गाँव बरौली खास → पूरब टोला। शहरी हिस्से में ब्लॉक और पंचायत नहीं हैं; रास्ता है: ज़िला → नगर पालिका → वार्ड 14 → गली नंबर 6। दोनों के ऊपर निर्वाचन ढाँचा है: विधानसभा → बूथ (भाग संख्या)। व्यवहार में इसका मतलब तीन फ़ैसले हैं। असाइनमेंट: गाँवों में GP पर, शहर में वार्ड पर। लोकेशन-नीति: गाँव में radius बड़ा और खुला आसमान — ‘क्षेत्र में’ ज़्यादा; शहर में वार्ड छोटे, इमारतें ऊँची, accuracy 50–200 m — ‘सीमा के पास’ और ‘कमज़ोर सिग्नल’ ज़्यादा, इसलिए समीक्षा-नीति पहले तय कीजिए। घर की पहचान: गाँव में घर-लेबल और मुखिया का नाम काफ़ी है; बहुमंज़िला इमारत में household roster चाहिए (एक बिल्डिंग, कई घर)।
जहाँ खुला polygon उपलब्ध है (ज़िला, विधानसभा, लोकसभा), वहाँ वही इस्तेमाल होता है और सीमा-स्थिति के साथ उसका स्रोत और तारीख दर्ज रहती है। गाँव और ज़्यादातर वार्डों के लिए ऐसा polygon सार्वजनिक रूप से एकसमान नहीं मिलता। वहाँ सीमा दो चीज़ों से बनती है: centroid — गाँव का जनगणना-आधारित केंद्र-बिंदु — और radius, जो गाँव के आकार से अनुमानित है। यह एक गोला है, असली सीमा नहीं; लंबे या बिखरे गाँव में किनारे के टोले इससे बाहर पड़ेंगे। इसी वजह से ‘सीमा के पास’ एक अलग वर्ग है और ऐसे रिकॉर्ड सीधे खारिज नहीं होते।
सुधार तीन रास्तों से आता है। पहला, सेटअप के दिन: missing-mapping रिपोर्ट बताती है कि कितने क्षेत्रों की boundary है, कितनों की अनुमानित और कितनों की नहीं — जो अस्पष्ट है वह ‘सत्यापन लंबित’ रहता है। दूसरा, फील्ड से: अगर किसी गाँव के वैध रिकॉर्ड बार-बार ‘सीमा के पास’ या ‘बाहर’ आ रहे हैं और सुपरवाइज़र कारण सहित exception दे रहा है (‘पूर्वी टोला radius से बाहर पड़ता है’), तो यह संकेत है कि उस क्षेत्र का centroid या radius ठीक करना है। तीसरा, आपसे: आपके पास सत्यापित सीमा हो — जैसे नगर निगम का GIS — तो वह प्रोजेक्ट में इम्पोर्ट हो सकती है और उस क्षेत्र का बैज ‘सत्यापित’ हो जाता है। तीनों स्थितियों में पुराने रिकॉर्ड नई सीमा से पुनः-वर्गीकृत होते हैं, पर हर रिकॉर्ड का मूल सबूत (lat/long, accuracy, समय) वही रहता है — इसलिए बाद में कोई भी देख सकता है कि पहले क्या वर्ग था और क्यों बदला।
Boundary status decides the badge, the review load and what you should plan for
सेटअप के दिन हर क्षेत्र के आगे इन तीन में से एक स्थिति लिखी होती है। इसी से तय होता है कि बैज क्या कहेगा और सुपरवाइज़र की कतार कितनी बड़ी होगी।
| सवाल | सत्यापित (polygon) | अनुमानित (centroid + radius) | उपलब्ध नहीं |
|---|---|---|---|
| आम तौर पर कहाँ | ज़िला, AC, PC; आपकी दी हुई GIS सीमा | गाँव, ज़्यादातर वार्ड | नया/अस्पष्ट क्षेत्र, स्थानीय टोला |
| ऐप में बैज | ‘सत्यापित’ | ‘अनुमानित रूप से क्षेत्र में’ | ‘अनुमानित निकटता’ |
| ‘सीमा के पास’ वर्ग | छोटा | बड़ा — किनारे के घर | — |
| ‘क्षेत्र से बाहर’ कब | polygon से साफ़ बाहर | किलोमीटरों दूर जैसे साफ़ मामले | — |
| सुपरवाइज़र की समीक्षा | कम | मध्यम; नीति पहले तय करें | ज़्यादा; mapping सत्यापन के बाद घटती है |
| कभी झूठा ‘Verified’ बैज | |||
| रिपोर्ट में | सीमा-स्थिति कॉलम | सीमा-स्थिति कॉलम | ‘सत्यापन लंबित’ सूची में |
When this geography is not what you need
LGD, सीमाएँ, बूथ सूची, वार्ड और पंचायत पर जो सवाल हर डेमो में आते हैं।
Local Government Directory (lgdirectory.gov.in) भारत सरकार (पंचायती राज मंत्रालय) की आधिकारिक निर्देशिका है, जिसमें हर राज्य, ज़िला, उप-ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत, गाँव, नगर निकाय और वार्ड का स्थायी संख्यात्मक कोड है। इसी से एक-नाम वाले दो गाँव अलग रहते हैं और डेटा दूसरे सरकारी सिस्टम (जैसे योजनाओं के पोर्टल) से मिलाया जा सकता है। Bharat Survey का पूरा भूगोल इन्हीं कोड पर है।
पूरे भारत का ढाँचा (राज्य से गाँव/वार्ड तक, LGD कोड के साथ) और लोकसभा/विधानसभा सूचियाँ सिस्टम में हैं। पहला विस्तृत लोड उत्तर प्रदेश (75 ज़िले, 403 विधानसभा) का है; बाकी राज्य प्रोजेक्ट शुरू होते ही 1–2 दिन में सत्यापित होकर लोड होते हैं। मतदान केंद्र (बूथ) सूची विधानसभा-वार CEO की PDF/CSV से इम्पोर्ट होती है।
ज़िला, विधानसभा और लोकसभा के लिए खुले लाइसेंस वाले polygons; गाँव/वार्ड के लिए centroid + radius (अनुमानित)। इसलिए बैज ‘अनुमानित रूप से क्षेत्र में’ कहता है, और साफ़ बाहर वाले रिकॉर्ड ही ‘क्षेत्र से बाहर’ फ़्लैग होते हैं; किनारे वाले ‘सीमा के पास’ समीक्षा में। जहाँ सत्यापित सीमा मिलती है, वहाँ बैज ‘सत्यापित’ हो जाता है। गाँव के बीच का एक GPS बिंदु पूरी सीमा नहीं है — हम इसे छिपाते नहीं।
एक विधानसभा = एक प्रोजेक्ट। पहले AC के भीतर की पंचायतें/वार्ड चुनें (सूची पहले से लोड), फिर बूथ मास्टर इम्पोर्ट करें, सुपरवाइज़र को ब्लॉक/ज़ोन दें, वॉलंटियर को पंचायत/वार्ड-वार असाइनमेंट। 10–30 सीटों का प्लान सामान्य है। रिपोर्ट पंचायत-वार और बूथ-वार रोल-अप में मिलती है; वॉर रूम बोर्ड AC-स्तर पर।
LGD से ULB और वार्ड की सूची; वार्ड-सीमा राज्य निर्वाचन आयोग की अधिसूचना से (परिसीमन के बाद प्रोजेक्ट-वार सत्यापन)। मोहल्ला/कॉलोनी को स्थानीय ID। असाइनमेंट वार्ड पर; घनी आबादी में GPS accuracy कमज़ोर हो सकती है, इसलिए ‘सीमा के पास’ और ‘कमज़ोर सिग्नल’ वर्ग की समीक्षा-नीति पहले तय करें। रिपोर्ट वार्ड-वार और ज़ोन-वार।
स्थानीय operational ID दिया जाता है, गाँव के अंदर उप-क्षेत्र के रूप में — आधिकारिक गाँव घोषित नहीं। रिपोर्ट में उसका स्रोत ‘स्थानीय’ लिखा होता है और वह LGD गाँव में रोल-अप होता है, ताकि सरकारी डेटा से मिलान बना रहे।
बूथ सूची विधानसभा-वार CEO/ECI की PDF या CSV से इम्पोर्ट होती है (भाग संख्या, बूथ नाम, भवन, क्षेत्र, मतदाता संख्या)। बूथ की लोकेशन मैनुअल पिन या upload से — आधिकारिक कोऑर्डिनेट सार्वजनिक रूप से एकसमान उपलब्ध नहीं हैं। मतदाता सूची का व्यक्तिगत डेटा v1 में इम्पोर्ट नहीं होता।
नहीं। ज़िला/AC/PC के polygons खुले लाइसेंस वाले डेटासेट से, गाँव के centroid जनगणना-आधारित, ULB/वार्ड LGD से। इसलिए हम गाँव/वार्ड की सीमा को ‘अनुमानित’ कहते हैं और उसे उसी तरह दिखाते हैं। जहाँ आपके पास सत्यापित सीमा (जैसे नगर निगम का GIS) है, वह प्रोजेक्ट में इम्पोर्ट हो सकती है।
हाँ — ऐप ऑफलाइन-फर्स्ट है। नक्शे की टाइल्स और फ़ॉर्म पहले डाउनलोड; GPS fix बिना नेटवर्क के भी; सिंक जब भी सिग्नल मिले। डैशबोर्ड पर ‘अंतिम अपडेट X मिनट पहले’ ईमानदारी से दिखता है। Offline Work Permit 24 घंटे (प्रोजेक्ट-वार बढ़ाया जा सकता है)।
ऐप हिंदी-प्रथम है, अंग्रेज़ी टॉगल एक टैप पर। फ़ॉर्म के लेबल हिंदी/अंग्रेज़ी में; XLSForm में अन्य भारतीय भाषा के कॉलम (label::mr, label::bn, आदि) जोड़े जा सकते हैं। क्षेत्र-नाम हिंदी + अंग्रेज़ी + स्थानीय प्रचलित नाम। ऐप UI की अन्य भारतीय भाषाएँ बाद के संस्करण में।
lgdirectory.gov.in पर राज्य → ज़िला → ब्लॉक/उप-ज़िला → ग्राम पंचायत → गाँव चुनकर हर इकाई का कोड, नाम (अंग्रेज़ी और स्थानीय भाषा) और उसका parent दिखता है; पूरी सूची डाउनलोड भी की जा सकती है। कोड एक साधारण संख्या है — उसके अंकों में ज़िला या ब्लॉक छिपा नहीं होता, इसलिए संबंध हमेशा mapping तालिका से पढ़े जाते हैं, कोड के अंकों से नहीं। Bharat Survey में यह कोड हर क्षेत्र-रिकॉर्ड और हर निर्यात में एक अलग कॉलम के रूप में मिलता है।
गाँव (राजस्व ग्राम) सबसे छोटी आधिकारिक इकाई है; एक ग्राम पंचायत में एक या कई गाँव होते हैं; कई ग्राम पंचायतें मिलकर ब्लॉक/विकासखंड बनाती हैं। व्यवहार में असाइनमेंट ग्राम पंचायत पर, लक्ष्य गाँव-वार और सुपरवाइज़र का दायरा ब्लॉक पर रखना सबसे आसान रहता है — रिपोर्ट भी इसी क्रम में GP → ब्लॉक → ज़िला रोल-अप होती है।
नहीं, ये दो अलग कोड-सूचियाँ हैं। LGD चालू प्रशासनिक ढाँचे की निर्देशिका है और समय के साथ अपडेट होती है; जनगणना के कोड जनगणना-वर्ष के ढाँचे के हैं। LGD में गाँवों के लिए जनगणना-कोड का संदर्भ भी रखा जाता है, और हम गाँव का centroid जनगणना-आधारित स्रोत से लेते हैं। जहाँ दोनों का मिलान साफ़ नहीं होता, वहाँ रिकॉर्ड ‘सत्यापन लंबित’ रहता है।
हाँ। ज़्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में ग्राम पंचायतें और एक-दो नगर निकाय दोनों होते हैं। प्रोजेक्ट में दोनों ढाँचे साथ चुने जाते हैं — ग्रामीण हिस्से में असाइनमेंट GP पर, शहरी हिस्से में वार्ड पर — और निर्वाचन ढाँचा (AC → बूथ) दोनों के ऊपर रोल-अप के लिए रहता है। रिपोर्ट पंचायत-वार और वार्ड-वार, दोनों रोल-अप में मिलती है।
हर डेटा-लोड के साथ उसका स्रोत और तारीख दर्ज रहती है, और प्रोजेक्ट शुरू होने पर उस राज्य का ताज़ा LGD संस्करण लोड करके सत्यापित किया जाता है। इसी वजह से ऊपर की तालिका में ज़िलों की संख्या ‘लगभग’ लिखी है। शहरी वार्डों में परिसीमन के बाद ताज़ा अधिसूचना से सत्यापन प्रोजेक्ट-वार होता है; अस्पष्ट mapping अनुमान से नहीं जोड़ी जाती।
ज़िला-स्तर के सर्वे में ज़िला = प्रोजेक्ट, ब्लॉक = सुपरवाइज़र का दायरा और ग्राम पंचायत/वार्ड = वॉलंटियर का असाइनमेंट रखिए। 1 सुपरवाइज़र पर 8–10 वॉलंटियर का अनुपात व्यावहारिक है। Missing-mapping रिपोर्ट से पहले दिन पता चल जाता है कि किस ब्लॉक की GP–गाँव mapping अधूरी है, ताकि वहाँ असाइनमेंट से पहले सत्यापन हो सके।

बताइए कौन-सा क्षेत्र — हम पंचायत/वार्ड सूची, सीमा-स्थिति और missing-mapping रिपोर्ट डेमो में दिखाते हैं।